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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

पैग़ाम पर शेर

नशेब-ए-हस्ती से अफ़्सोस हम उभर सके

फ़राज़-ए-दार से पैग़ाम आए हैं क्या क्या

कैफ़ी आज़मी

ज़रूर अमन का पैग़ाम ले गया था कहीं

परिंदा लौटा लिए पर लहू में डूबे हुए

अब्ब्दुर्रऊफ़ अन्जुम

किन राहों से हो कर आई हो किस गुल का संदेसा लाई हो

हम बाग़ में ख़ुश ख़ुश बैठे थे क्या कर दिया के सबा तुम ने

इब्न-ए-इंशा

पैग़ाम तो उन का आया है तुम शहर में 'तिश्ना' जाओ

सहरा है पसंदीदा हम को हम शहर में जा कर क्या करते

ज़हीर-उल-हसन तिश्ना

रंगून में चलती हवा मेरा संदेसा लेती जा

तेरा तो उन की गलियों में आना-जाना होगा ही

कुमार पाशी

मुद्दत हुई उस को कि मिरी ख़ल्वत-ए-शब में

पैग़ाम जो लाई थी सबा याद है अब तक

सदार ख़ान सोज़

कब वो पैग़ाम-रसा हो कि मुझे सब्र नहीं

काकुल-ए-ख़म के लिए शे'र रक़म करता हूँ

ओसामा अमीर
बोलिए