क़िस्सा-ए-दर्द को करते हुए ज़ब्त-ए-तहरीर
रोते रोते भी तिरे नाम पे हँस देता हूँ
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टैग : गिर्या-ओ-ज़ारी
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
क़िस्सा-ए-दर्द को करते हुए ज़ब्त-ए-तहरीर
रोते रोते भी तिरे नाम पे हँस देता हूँ