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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

आबिद अदीब के शेर

जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के

उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा

सफ़र में ऐसे कई मरहले भी आते हैं

हर एक मोड़ पे कुछ लोग छूट जाते हैं

अमीर-ए-कारवाँ है तंग हम से

हमारा रास्ता सब से अलग है

जिन्हें ये फ़िक्र नहीं सर रहे रहे रहे

वो सच ही कहते हैं जब बोलने पे आते हैं

ज़माना मुझ से जुदा हो गया ज़माना हुआ

रहा है अब तो बिछड़ने को मुझ से तू बाक़ी

हम से 'आबिद' अपने रहबर को शिकायत ये रही

आँख मूँदे उन के पीछे चलने वाले हम नहीं

शाहराहें दफ़अ'तन शो'ले उगलने लग गईं

घर की जानिब चल पड़ा है शहर घेरा कर तमाम

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