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आफ़ताब हुसैन

1962 | ऑस्ट्रिया

विख्यात पाकिस्तानी शायर, ऑस्ट्रिया में प्रवास, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में प्रतिष्ठित।

विख्यात पाकिस्तानी शायर, ऑस्ट्रिया में प्रवास, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में प्रतिष्ठित।

आफ़ताब हुसैन

ग़ज़ल 35

शेर 39

कुछ और तरह की मुश्किल में डालने के लिए

मैं अपनी ज़िंदगी आसान करने वाला हूँ

लोग किस किस तरह से ज़िंदा हैं

हमें मरने का भी सलीक़ा नहीं

किसी तरह तो घटे दिल की बे-क़रारी भी

चलो वो चश्म नहीं कम से कम शराब तो हो

करता कुछ और है वो दिखाता कुछ और है

दर-अस्ल सिलसिला पस-ए-पर्दा कुछ और है

ज़रा जो फ़ुर्सत-ए-नज़्ज़ारगी मयस्सर हो

तो एक पल में भी क्या क्या है देखने के लिए

पुस्तकें 6

 

ऑडियो 15

अपना दीवाना बना कर ले जाए

अस्ल हालत का बयाँ ज़ाहिर के साँचों में नहीं

कभी जो रास्ता हमवार करने लगता हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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