Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Allama Iqbal's Photo'

अल्लामा इक़बाल

1877 - 1938 | लाहौर, पाकिस्तान

महान उर्दू शायर, पाकिस्तान के राष्ट्र-कवि जिन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' और 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' जैसे गीतों की रचना की

महान उर्दू शायर, पाकिस्तान के राष्ट्र-कवि जिन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' और 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' जैसे गीतों की रचना की

अल्लामा इक़बाल

ग़ज़ल 114

नज़्म 433

अशआर 136

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं

तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

Interpretation: Rekhta AI

वक्ता अपनी अयोग्यता स्वीकार करके विनम्रता दिखाता है, पर अपनी सच्ची चाह और लगातार प्रतीक्षा को अपने पक्ष में रखता है। वह कहता है कि मिलने की पात्रता सही, मेरी लगन तो देखी जाए। यहाँ “दीद” केवल देखना नहीं, बल्कि निकटता और कृपा का संकेत है। भाव का केंद्र तड़प, भक्ति-सा समर्पण और आशा है।

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर आत्म-शक्ति और आत्म-निर्माण का संदेश देता है। “स्वत्व/ख़ुदी” यहाँ जागरूक, अनुशासित और साहसी व्यक्तित्व का रूपक है जो हालात के आगे हार नहीं मानता। ईश्वर का बंदे से पूछना यह दिखाता है कि सही दिशा में बढ़ा हुआ इंसान केवल भाग्य पर नहीं टिकता, वह चुनता और गढ़ता है। भावनात्मक रूप से यह विश्वास, प्रयास और जिम्मेदारी की पुकार है।

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है

बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

Interpretation: Rekhta AI

यहाँ नरगिस को आँख का रूपक माना गया है और “बे-नूरी” से आशय भीतर की रोशनी/समझ की कमी है। “चमन” समाज या दुनिया है, जहाँ सही दृष्टि रखने वाला व्यक्ति बहुत कम मिलता है। भाव यह है कि अज्ञान और अंधापन लंबे समय तक रहता है, और सच्ची दूरदृष्टि का जन्म दुर्लभ होता है।

  • शेयर कीजिए

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा

तिरे सामने आसमाँ और भी हैं

Interpretation: Rekhta AI

बाज़ यहाँ ऊँचे हौसले और स्वतंत्र स्वभाव का प्रतीक है, जो रुककर नहीं जीता बल्कि ऊपर उठता रहता है। कवि कहता है कि संतोष करके ठहरना नहीं, आगे बढ़ते रहना चाहिए। “और भी आकाश” नए अवसरों और बड़ी मंज़िलों का रूपक है। भाव-केन्द्र में उम्मीद और निरंतर प्रयास की पुकार है।

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर

तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में

Interpretation: Rekhta AI

यहाँ “शाहीं/बाज़” ऊँची सोच, स्वाभिमान और स्वतंत्र जीवन का प्रतीक है। महल का गुंबद आराम, पराधीनता और सत्ता के सहारे जीने की ओर इशारा करता है, जबकि पहाड़ों की चट्टानें संघर्ष, ऊँचाई और आज़ादी दिखाती हैं। शेर कहता है कि आसान सुविधाओं के लिए अपना आत्मसम्मान छोड़ो। भाव यह है कि कठिन रास्ता चुनकर भी गरिमा के साथ जियो।

  • शेयर कीजिए

उद्धरण 10

तहज़ीब एक ताक़तवर इन्सान की फ़िक्र है।

  • शेयर कीजिए

इन्सानों से मिलने वाले सदमात के इलावा इन्सान की याददाश्त आम तौर पर ख़राब होती है।

  • शेयर कीजिए

इन्साफ़ एक बेकराँ ख़ज़ाना है। लेकिन हमें इसे रहम के चोर से महफ़ूज़ रखना चाहिए।

  • शेयर कीजिए

अफ़राद और कौमें ख़त्म हो जाती हैं। मगर उनके बच्चे यानी तसव्वुरात कभी ख़त्म नहीं होते।

  • शेयर कीजिए

यक़ीन एक बड़ी ताक़त है। जब मैं देखता हूँ कि दूसरा भी मेरे अफ़्कार का मुअय्यिद है, तो उसकी सदाक़त के बारे में मेरा एतिमाद बे-इंतिहा बढ़ जाता है।

  • शेयर कीजिए

क़ितआ 10

रुबाई 23

क़िस्सा 13

पुस्तकें 1302

चित्र शायरी 22

वीडियो 463

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायरी वीडियो

अल्लामा इक़बाल

Mohd. Iqbal - Zubaan-e-Ishq

मुज़फ्फर अली

ऑडियो 58

अगर कज-रौ हैं अंजुम आसमाँ तेरा है या मेरा

अपनी जौलाँ-गाह ज़ेर-ए-आसमाँ समझा था मैं

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में

Recitation

संबंधित ब्लॉग

 

"लाहौर" के और शायर

Recitation

बोलिए