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पाकिस्तान की नई पीढ़ी के मशहूर शायर, ‘मैं किसी दास्तान से उभरूँगा’ इनके काव्य संग्रह का नाम है

पाकिस्तान की नई पीढ़ी के मशहूर शायर, ‘मैं किसी दास्तान से उभरूँगा’ इनके काव्य संग्रह का नाम है

अज़हर फ़राग़ के शेर

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तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल

ये सुहुलत तो मुझे सारा जहाँ देता है

तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल

ये सुहुलत तो मुझे सारा जहाँ देता है

दफ़्तर से मिल नहीं रही छुट्टी वगर्ना मैं

बारिश की एक बूँद बे-कार जाने दूँ

दफ़्तर से मिल नहीं रही छुट्टी वगर्ना मैं

बारिश की एक बूँद बे-कार जाने दूँ

जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी

दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था

जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी

दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था

ये नहीं देखते कितनी है रियाज़त किस की

लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को

ये नहीं देखते कितनी है रियाज़त किस की

लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को

दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था

तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था

दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था

तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था

ख़तों को खोलती दीमक का शुक्रिया वर्ना

तड़प रही थी लिफ़ाफ़ों में बे-ज़बानी पड़ी

ख़तों को खोलती दीमक का शुक्रिया वर्ना

तड़प रही थी लिफ़ाफ़ों में बे-ज़बानी पड़ी

मैं जानता हूँ मुझे मुझ से माँगने वाले

पराई चीज़ का जो लोग हाल करते हैं

मैं जानता हूँ मुझे मुझ से माँगने वाले

पराई चीज़ का जो लोग हाल करते हैं

अच्छे-ख़ासे लोगों पर भी वक़्त इक ऐसा जाता है

और किसी पर हँसते हँसते ख़ुद पर रोना जाता है

अच्छे-ख़ासे लोगों पर भी वक़्त इक ऐसा जाता है

और किसी पर हँसते हँसते ख़ुद पर रोना जाता है

वो दस्तियाब हमें इस लिए नहीं होता

हम इस्तिफ़ादा नहीं देख-भाल करते हैं

वो दस्तियाब हमें इस लिए नहीं होता

हम इस्तिफ़ादा नहीं देख-भाल करते हैं

बता रहा है झटकना तिरी कलाई का

ज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का

बता रहा है झटकना तिरी कलाई का

ज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का

इज़ाला हो गया ताख़ीर से निकलने का

गुज़र गई है सफ़र में मिरे क़याम की शाम

इज़ाला हो गया ताख़ीर से निकलने का

गुज़र गई है सफ़र में मिरे क़याम की शाम

उसे कहो जो बुलाता है गहरे पानी में

किनारे से बंधी कश्ती का मसअला समझे

उसे कहो जो बुलाता है गहरे पानी में

किनारे से बंधी कश्ती का मसअला समझे

उस से हम पूछ थोड़ी सकते हैं

उस की मर्ज़ी जहाँ रखे जिस को

उस से हम पूछ थोड़ी सकते हैं

उस की मर्ज़ी जहाँ रखे जिस को

गीले बालों को सँभाल और निकल जंगल से

इस से पहले कि तिरे पाँव ये झरना पड़ जाए

गीले बालों को सँभाल और निकल जंगल से

इस से पहले कि तिरे पाँव ये झरना पड़ जाए

तुझ से कुछ और त'अल्लुक़ भी ज़रूरी है मिरा

ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है

तुझ से कुछ और त'अल्लुक़ भी ज़रूरी है मिरा

ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है

मेरी नुमू है तेरे तग़ाफ़ुल से वाबस्ता

कम बारिश भी मुझ को काफ़ी हो सकती है

मेरी नुमू है तेरे तग़ाफ़ुल से वाबस्ता

कम बारिश भी मुझ को काफ़ी हो सकती है

ऐसी ग़ुर्बत को ख़ुदा ग़ारत करे

फूल भेजवाने की गुंजाइश हो

ऐसी ग़ुर्बत को ख़ुदा ग़ारत करे

फूल भेजवाने की गुंजाइश हो

मिल गया तू मुझे मेरा नहीं रहने देगा

वो समुंदर मुझे क़तरा नहीं रहने देगा

मिल गया तू मुझे मेरा नहीं रहने देगा

वो समुंदर मुझे क़तरा नहीं रहने देगा

हमारे ज़ाहिरी अहवाल पर जा हम लोग

क़याम अपने ख़द-ओ-ख़ाल में नहीं करते

हमारे ज़ाहिरी अहवाल पर जा हम लोग

क़याम अपने ख़द-ओ-ख़ाल में नहीं करते

आँख खुलते ही जबीं चूमने जाते हैं

हम अगर ख़्वाब में भी तुम से लड़े होते हैं

आँख खुलते ही जबीं चूमने जाते हैं

हम अगर ख़्वाब में भी तुम से लड़े होते हैं

ये ए'तिमाद भी मेरा दिया हुआ है तुम्हें

जो मेरे मशवरे बे-कार जाने लग गए हैं

ये ए'तिमाद भी मेरा दिया हुआ है तुम्हें

जो मेरे मशवरे बे-कार जाने लग गए हैं

किसी बदन की सयाहत निढाल करती है

किसी के हाथ का तकिया थकान खींचता है

किसी बदन की सयाहत निढाल करती है

किसी के हाथ का तकिया थकान खींचता है

बहुत से साँप थे इस ग़ार के दहाने पर

दिल इस लिए भी ख़ज़ाना शुमार होने लगा

बहुत से साँप थे इस ग़ार के दहाने पर

दिल इस लिए भी ख़ज़ाना शुमार होने लगा

बदल के देख चुकी है रेआया साहिब-ए-तख़्त

जो सर क़लम नहीं करता ज़बान खींचता है

बदल के देख चुकी है रेआया साहिब-ए-तख़्त

जो सर क़लम नहीं करता ज़बान खींचता है

मैं ये चाहता हूँ कि उम्र-भर रहे तिश्नगी मिरे इश्क़ में

कोई जुस्तुजू रहे दरमियाँ तिरे साथ भी तिरे बा'द भी

मैं ये चाहता हूँ कि उम्र-भर रहे तिश्नगी मिरे इश्क़ में

कोई जुस्तुजू रहे दरमियाँ तिरे साथ भी तिरे बा'द भी

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