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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

1911 - 1984 | लाहौर, पाकिस्तान

सबसे प्रख्यात एवं प्रसिद्ध शायर। अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण कई साल कारावास में रहे

सबसे प्रख्यात एवं प्रसिद्ध शायर। अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण कई साल कारावास में रहे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ग़ज़ल 89

नज़्म 150

अशआर 87

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब

आज तुम याद बे-हिसाब आए

और क्या देखने को बाक़ी है

आप से दिल लगा के देख लिया

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

क़ितआ 37

क़िस्सा 3

 

लेख 3

 

लोरी 1

 

पुस्तकें 136

चित्र शायरी 54

वीडियो 348

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अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

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