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फ़रीद परबती

1961 - 2011 | श्रीनगर, भारत

फ़रीद परबती

ग़ज़ल 15

शेर 5

किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह

लुटा के बैठोगे सब्र क़रार मेरी तरह

कभी मेरी तलब कच्चे घड़े पर पार उतरती है

कभी महफ़ूज़ कश्ती में सफ़र करने से डरता हूँ

तुम्हें भी भूलने की कोशिशें कीं

कि ख़ुद पर भी क़यामत कर गया वो

'फ़रीद' इक दिन सहारे ज़िंदगी के टूट जाएँगे

सबब ये है कि ख़ुद को बे-सहारा कर रहा हूँ मैं

बगूला बन के उड़ा ख़्वाहिशों के सहरा में

ठहर गया तो फ़क़त था ग़ुबार मेरी तरह

रुबाई 12

पुस्तकें 19

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI