Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Hafeez Jalandhari's Photo'

हफ़ीज़ जालंधरी

1900 - 1982 | लाहौर, पाकिस्तान

लोकप्रिय रूमानी शायर, पाकिस्तान का राष्ट्रगान लिखा

लोकप्रिय रूमानी शायर, पाकिस्तान का राष्ट्रगान लिखा

हफ़ीज़ जालंधरी के शेर

93.1K
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ

कहीं ऐसा हो जाए कहीं ऐसा हो जाए

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ

कहीं ऐसा हो जाए कहीं ऐसा हो जाए

देखा जो खा के तीर कमीं-गाह की तरफ़

अपने ही दोस्तों से मुलाक़ात हो गई

देखा जो खा के तीर कमीं-गाह की तरफ़

अपने ही दोस्तों से मुलाक़ात हो गई

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब

मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब

मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं

वफ़ा जिस से की बेवफ़ा हो गया

जिसे बुत बनाया ख़ुदा हो गया

वफ़ा जिस से की बेवफ़ा हो गया

जिसे बुत बनाया ख़ुदा हो गया

कोई चारह नहीं दुआ के सिवा

कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा

कोई चारह नहीं दुआ के सिवा

कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा

हम ही में थी कोई बात याद तुम को सके

तुम ने हमें भुला दिया हम तुम्हें भुला सके

हम ही में थी कोई बात याद तुम को सके

तुम ने हमें भुला दिया हम तुम्हें भुला सके

क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँ दर्द के रोने रोता है

अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है

क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँ दर्द के रोने रोता है

अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है

ये मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती है

बात होती है मगर बात नहीं होती है

ये मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती है

बात होती है मगर बात नहीं होती है

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली

उर्दू हिन्दी हिन्दोस्तानी

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली

उर्दू हिन्दी हिन्दोस्तानी

इलाही एक ग़म-ए-रोज़गार क्या कम था

कि इश्क़ भेज दिया जान-ए-मुब्तला के लिए

इलाही एक ग़म-ए-रोज़गार क्या कम था

कि इश्क़ भेज दिया जान-ए-मुब्तला के लिए

दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा

अब मैं दिल को क्या समझाऊँ मुझ को भी समझाता जा

दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा

अब मैं दिल को क्या समझाऊँ मुझ को भी समझाता जा

जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा

वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं

जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा

वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं

भुलाई नहीं जा सकेंगी ये बातें

तुम्हें याद आएँगे हम याद रखना

भुलाई नहीं जा सकेंगी ये बातें

तुम्हें याद आएँगे हम याद रखना

मुझ से क्या हो सका वफ़ा के सिवा

मुझ को मिलता भी क्या सज़ा के सिवा

मुझ से क्या हो सका वफ़ा के सिवा

मुझ को मिलता भी क्या सज़ा के सिवा

आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए

आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए

आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए

आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए

मिरी मजबूरियाँ क्या पूछते हो

कि जीने के लिए मजबूर हूँ मैं

मिरी मजबूरियाँ क्या पूछते हो

कि जीने के लिए मजबूर हूँ मैं

दिल लगाओ तो लगाओ दिल से दिल

दिल-लगी ही दिल-लगी अच्छी नहीं

दिल लगाओ तो लगाओ दिल से दिल

दिल-लगी ही दिल-लगी अच्छी नहीं

किस मुँह से कह रहे हो हमें कुछ ग़रज़ नहीं

किस मुँह से तुम ने व'अदा किया था निबाह का

किस मुँह से कह रहे हो हमें कुछ ग़रज़ नहीं

किस मुँह से तुम ने व'अदा किया था निबाह का

मुझे तो इस ख़बर ने खो दिया है

सुना है मैं कहीं पाया गया हूँ

मुझे तो इस ख़बर ने खो दिया है

सुना है मैं कहीं पाया गया हूँ

बे-तअल्लुक़ ज़िंदगी अच्छी नहीं

ज़िंदगी क्या मौत भी अच्छी नहीं

बे-तअल्लुक़ ज़िंदगी अच्छी नहीं

ज़िंदगी क्या मौत भी अच्छी नहीं

रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं

वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं

रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं

वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं

दिल को ख़ुदा की याद तले भी दबा चुका

कम-बख़्त फिर भी चैन पाए तो क्या करूँ

दिल को ख़ुदा की याद तले भी दबा चुका

कम-बख़्त फिर भी चैन पाए तो क्या करूँ

तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक

क़यामत चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया

तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक

क़यामत चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया

नहीं इताब-ए-ज़माना ख़िताब के क़ाबिल

तिरा जवाब यही है कि मुस्कुराए जा

नहीं इताब-ए-ज़माना ख़िताब के क़ाबिल

तिरा जवाब यही है कि मुस्कुराए जा

अहबाब का शिकवा क्या कीजिए ख़ुद ज़ाहिर बातिन एक नहीं

लब ऊपर ऊपर हँसते हैं दिल अंदर अंदर रोता है

अहबाब का शिकवा क्या कीजिए ख़ुद ज़ाहिर बातिन एक नहीं

लब ऊपर ऊपर हँसते हैं दिल अंदर अंदर रोता है

Recitation

बोलिए