हक़ीर

ग़ज़ल 10

शेर 22

जानता उस को हूँ दवा की तरह

चाहता उस को हूँ शिफ़ा की तरह

क्या जानें उन की चाल में एजाज़ है कि सेहर

वो भी उन्हीं से मिल गए जो थे हमारे लोग

ख़ूब मिल कर गले से रो लेना

इस से दिल की सफ़ाई होती है

थोड़ी तकलीफ़ सही आने में

दो घड़ी बैठ के उठ जाइएगा

टूटें वो सर जिस में तेरी ज़ुल्फ़ का सौदा नहीं

फूटें वो आँखें कि जिन को दीद का लपका नहीं

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI