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इस्माइल मेरठी

1844 - 1917 | मेरठ, भारत

बच्चों की शायरी के लिए प्रसिद्ध

बच्चों की शायरी के लिए प्रसिद्ध

इस्माइल मेरठी

ग़ज़ल 49

नज़्म 27

अशआर 58

क्या हो गया इसे कि तुझे देखती नहीं

जी चाहता है आग लगा दूँ नज़र को मैं

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बद की सोहबत में मत बैठो इस का है अंजाम बुरा

बद बने तो बद कहलाए बद अच्छा बदनाम बुरा

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दोस्ती और किसी ग़रज़ के लिए

वो तिजारत है दोस्ती ही नहीं

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है आज रुख़ हवा का मुआफ़िक़ तो चल निकल

कल की किसे ख़बर है किधर की हवा चले

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कभी भूल कर किसी से करो सुलूक ऐसा

कि जो तुम से कोई करता तुम्हें नागवार होता

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रुबाई 80

पुस्तकें 19

चित्र शायरी 3

 

ऑडियो 8

आग़ाज़-ए-इश्क़ उम्र का अंजाम हो गया

इतना तो जानते हैं कि बंदे ख़ुदा के हैं

कभी तक़्सीर जिस ने की ही नहीं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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