Mirza Ghalib's Photo'

मिर्ज़ा ग़ालिब

1797 - 1869 | दिल्ली, भारत

महान शायर/विश्व-साहित्य में उर्दू की आवाज़/सब से अधिक लोकप्रिय सुने और सुनाए जाने वाले अशआर के रचयिता

महान शायर/विश्व-साहित्य में उर्दू की आवाज़/सब से अधिक लोकप्रिय सुने और सुनाए जाने वाले अशआर के रचयिता

मिर्ज़ा ग़ालिब

ग़ज़ल 234

शेर 370

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन

दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है

इस सादगी पे कौन मर जाए ख़ुदा

लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं

इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया

वर्ना हम भी आदमी थे काम के

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का

उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले

बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

मर्सिया 1

 

क़ितआ 28

रुबाई 34

क़िस्सा 18

सेहरा 3

 

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Asad Ullah Khan Ghalib-Safar - Part 1 - Zubaan-e-Ishq

मुज़फ्फर अली

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मुज़फ्फर अली

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zikr mera ba-badi bhi use manzur nahin

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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