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नसीर तुराबी

1945 - 2021 | कराची, पाकिस्तान

मक़बूल पाकिस्तानी धारावाहिक हमसफ़र के टाइटल गीत और ग़ज़ल “ वो हमसफ़र था मगर…” के प्रसिद्ध शायर

मक़बूल पाकिस्तानी धारावाहिक हमसफ़र के टाइटल गीत और ग़ज़ल “ वो हमसफ़र था मगर…” के प्रसिद्ध शायर

नसीर तुराबी

ग़ज़ल 16

अशआर 16

मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता

दिल उस से मिला जिस से मुक़द्दर नहीं मिलता

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अदावतें थीं, तग़ाफ़ुल था, रंजिशें थीं बहुत

बिछड़ने वाले में सब कुछ था, बेवफ़ाई थी

शहर में किस से सुख़न रखिए किधर को चलिए

इतनी तन्हाई तो घर में भी है घर को चलिए

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वो हम-सफ़र था मगर उस से हम-नवाई थी

कि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई थी

कुछ रोज़ नसीर आओ चलो घर में रहा जाए

लोगों को ये शिकवा है कि घर पर नहीं मिलता

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चित्र शायरी 4

 

वीडियो 48

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

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