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Born in a literary family of Darbhanga. Young Poet of Urdu, Hindi & Maithili.

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राहुल झा

ग़ज़ल 13

नज़्म 1

 

अशआर 5

कुछ इस अदा से मोहब्बत-शनास होना है

ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है

ये आशिक़ी तिरे बस की नहीं सो रहने दे

कि तेरा काम तो बस ना-सिपास होना है

अज़ल से मेरी हिफ़ाज़त का फ़र्ज़ है उन पर

सभी दुखों को मेरे आस-पास होना है

उस ने इक बार तो झाँका भी था मुझ में लेकिन

उस से देखी गई वुसअत-ए-तन्हाई मिरी

मैं आज सोग मनाना सिखाने वाला हूँ

इधर को आएँ जिन्हें महव-ए-यास होना है

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