शबाब मेरठी

शेर 1

उस एक चेहरे के पीछे हज़ार चेहरे हैं

हज़ार चेहरों का वो क़ाफ़िला सा लगता है

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI