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शहज़ाद अहमद

1932 - 2012 | लाहौर, पाकिस्तान

नई ग़ज़ल के प्रमुखतम पाकिस्तानी शायरों में विख्यात

नई ग़ज़ल के प्रमुखतम पाकिस्तानी शायरों में विख्यात

शहज़ाद अहमद

ग़ज़ल 95

शेर 195

गुज़रने ही दी वो रात मैं ने

घड़ी पर रख दिया था हाथ मैं ने

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छोड़ने मैं नहीं जाता उसे दरवाज़े तक

लौट आता हूँ कि अब कौन उसे जाता देखे

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शौक़-ए-सफ़र बे-सबब और सफ़र बे-तलब

उस की तरफ़ चल दिए जिस ने पुकारा था

जब उस की ज़ुल्फ़ में पहला सफ़ेद बाल आया

तब उस को पहली मुलाक़ात का ख़याल आया

हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब

ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया

पुस्तकें 21

Adh Khula Dareecha

 

1977

Araish-e-Mahfil

 

1963

Fikriyaat

 

2009

Kulliyat-e-Zauq

 

2009

मजमूआ-ए-मरासी

 

1979

Pakistani Adab-1990

Intikhab-e-Sher

1991

Rang-e-Ghazal

Hind-o-Pak Ki Urdu Ghazal 1947-88

1989

Sehrul-Bayan

 

2009

चहार-सू

Shumara Number-000

2009

मख़ज़न

शुमारा नम्बर-001

2010

चित्र शायरी 6

बिगड़ी हुई इस शहर की हालत भी बहुत है जाऊँ भी कहाँ इस से मोहब्बत भी बहुत है

नींद आती है अगर जलती हुई आँखों में कोई दीवाने की ज़ंजीर हिला देता है

गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने घड़ी पर रख दिया था हाथ मैं ने

 

वीडियो 12

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Gaye khurshid ko kisne pukaara

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

डूब जाएँगे सितारे और बिखर जाएगी रात

शहज़ाद अहमद

प्यार के रंग-महल बरसों में तय्यार हुए

शहज़ाद अहमद

ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े

शहज़ाद अहमद

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