ताजवर नजीबाबादी
ग़ज़ल 7
अशआर 9
दिल के पर्दों में छुपाया है तिरे इश्क़ का राज़
ख़ल्वत-ए-दिल में भी पर्दा नज़र आता है मुझे
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