इतना नज़रों से गिरा है कोई
उस को देखूँ तो हँसी आती है
बदल न लें कहीं रस्ता ये आग की लपटें
हमें ही राख न कर दें ये नफ़रतें अपनी
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
इतना नज़रों से गिरा है कोई
उस को देखूँ तो हँसी आती है
बदल न लें कहीं रस्ता ये आग की लपटें
हमें ही राख न कर दें ये नफ़रतें अपनी