नींद आ जाए तो फिर धूप न साया कोई
पाँव थक जाएँ तो परदेस भी घर लगता है
करिश्मा-साज़ी-ए-हुस्न-ए-अज़ल अरे तौबा
मिरा ही आईना मुझ को दिखा के लूट लिया
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टैग्ज़ : उर्दू ग़ज़लऔर 1 अन्य
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
नींद आ जाए तो फिर धूप न साया कोई
पाँव थक जाएँ तो परदेस भी घर लगता है
करिश्मा-साज़ी-ए-हुस्न-ए-अज़ल अरे तौबा
मिरा ही आईना मुझ को दिखा के लूट लिया