aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
शब्दार्थ
रात आ कर गुज़र भी जाती है
इक हमारी सहर नहीं होती
"शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती" ग़ज़ल से की इब्न-ए-इंशा
उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है।
देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ सा कहाँ से उठता है
see if it rises from the heart or from the soul it flows
does anybody know the source from where this smoke arose?
see if it rises from the heart or from the soul it flows
does anybody know the source from where this smoke arose?