aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Liaqat Jafri's Photo'

लियाक़त जाफ़री

जम्मू, भारत

लियाक़त जाफ़री के शेर

1.8K
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

इश्क़ तू ने बड़ा नुक़सान किया है मेरा

मैं तो उस शख़्स से नफ़रत भी नहीं कर सकता

मिरे क़बीले में ता'लीम का रिवाज था

मिरे बुज़ुर्ग मगर तख़्तियाँ बनाते थे

जहाँ जो था वहीं रहना था उस को

मगर ये लोग हिजरत कर रहे हैं

मैं दौड़ दौड़ के ख़ुद को पकड़ के लाता हूँ

तुम्हारे इश्क़ ने बच्चा बना दिया है मुझे

मेरी जानिब बढ़ना अब मोहब्बत

मैं अब पहले से मुश्किल रास्ता हूँ

मैं बहुत जल्द लौट आऊँगा

तुम मिरा इंतिज़ार मत करना

मैं कुछ दिन से अचानक फिर अकेला पड़ गया हूँ

नए मौसम में इक वहशत पुरानी काटती है

वजूद अपना है और आप तय करेंगे हम

कहाँ पे होना है हम को कहाँ नहीं होना

हम भी जी भर के तुझे कोसते फिरते लेकिन

हम तिरा लहजा-ए-बे-बाक कहाँ से लाएँ

लफ़्ज़ को इल्हाम मअ'नी को शरर समझा था मैं

दर-हक़ीक़त ऐब था जिस को हुनर समझा था मैं

फिर मुरत्तब किए गए जज़्बात

इश्क़ को इब्तिदा में रक्खा गया

हालाँकि पहले साए से रहती थी कश्मकश

अब अपने बोझ से ही दबा जा रहा हूँ मैं

वो हंगामा गुज़र जाता उधर से

मगर रस्ते में ख़ामोशी पड़ी है

मैं आख़िरी था जिसे सरफ़राज़ होना था

मिरे हुनर में भी कोताहियाँ निकल आईं

उसी के नूर से ये रौशनी बची हुई थी

मिरे नसीब में जो तीरगी बची हुई थी

सफ़र उलझा दिए हैं उस ने सारे

मिरे पैरों में जो तेज़ी पड़ी है

उस आइने में था सरसब्ज़ बाग़ का मंज़र

छुआ जो मैं ने तो दो तितलियाँ निकल आईं

एक आसेब तआक़ुब में लगा रहता है

मैं जो रुकता हूँ तो फिर उस की सदा चलती है

Recitation

Jashn-e-Rekhta | 8-9-10 December 2023 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate - New Delhi

GET YOUR PASS
बोलिए