संपूर्ण
परिचय
ग़ज़ल96
नज़्म59
शेर114
ई-पुस्तक22
टॉप 20 शायरी 20
चित्र शायरी 22
ऑडियो 43
वीडियो77
गेलरी 1
ब्लॉग2
दोहा1
शायरी के अनुवाद4
मुनीर नियाज़ी
ग़ज़ल 96
नज़्म 59
अशआर 114
आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
मुद्दत के ब'अद आज उसे देख कर 'मुनीर'
इक बार दिल तो धड़का मगर फिर सँभल गया
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
इक और दरिया का सामना था 'मुनीर' मुझ को
मैं एक दरिया के पार उतरा तो मैं ने देखा
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
दोहा 1
शायरी के अनुवाद 4
पुस्तकें 22
चित्र शायरी 22
लाखों शक्लों के मेले में तन्हा रहना मेरा काम भेस बदल कर देखते रहना तेज़ हवाओं का कोहराम एक तरफ़ आवाज़ का सूरज एक तरफ़ इक गूँगी शाम एक तरफ़ जिस्मों की ख़ुशबू एक तरफ़ उस का अंजाम बन गया क़ातिल मेरे लिए तो अपनी ही नज़रों का दाम सब से बड़ा है नाम ख़ुदा का उस के बाद है मेरा नाम