शायरी रचने का दर्द: ज़ाती ग़म से पूरी कायनात के तालमेल तक का सफ़र
शायर आम इंसानों के मुक़ाबले में अंदरूनी उथल-पुथल को ज़्यादा शिद्दत से महसूस करता है, और इसी दर्द को अपनी जमालियाती (सौंदर्यपरक) समझ के ज़रिए एक महान कलाकृति में ढाल कर समाज का इलाज करता है।