इश्काल (कठिनाई) बनाम इबहाम (अस्पष्टता): ग़ालिब की शायरी का अस्ली हुस्न
ग़ालिब की शायरी को आमतौर पर 'मुश्किल' कहा जाता है, लेकिन आलोचनात्मक नज़र से देखें तो यह इश्काल (कठिनाई) नहीं बल्कि 'इबहाम' (अस्पष्टता) है, जो शेर की कमी नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी ख़ूबी है।