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निज़ाम रामपुरी

1819 - 1872 | रामपुर, भारत

निज़ाम रामपुरी के शेर

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अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो

और ये भी देखते हैं कोई देखता हो

अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो

और ये भी देखते हैं कोई देखता हो

अंगड़ाई भी वो लेने पाए उठा के हाथ

देखा जो मुझ को छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ

अंगड़ाई भी वो लेने पाए उठा के हाथ

देखा जो मुझ को छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ

है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम

मैं ये क्यूँ पूछूँ कब मिलेंगे आप

है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम

मैं ये क्यूँ पूछूँ कब मिलेंगे आप

तेरे ही ग़म में मर गए सद-शुक्र

आख़िर इक दिन तो हम को मरना था

तेरे ही ग़म में मर गए सद-शुक्र

आख़िर इक दिन तो हम को मरना था

अब तुम से क्या किसी से शिकायत नहीं मुझे

तुम क्या बदल गए कि ज़माना बदल गया

अब तुम से क्या किसी से शिकायत नहीं मुझे

तुम क्या बदल गए कि ज़माना बदल गया

अब आओ मिल के सो रहें तकरार हो चुकी

आँखों में नींद भी है बहुत रात कम भी है

अब आओ मिल के सो रहें तकरार हो चुकी

आँखों में नींद भी है बहुत रात कम भी है

बोसा तो उस लब-ए-शीरीं से कहाँ मिलता है

गालियाँ भी मिलीं हम को तो मिलीं थोड़ी सी

बोसा तो उस लब-ए-शीरीं से कहाँ मिलता है

गालियाँ भी मिलीं हम को तो मिलीं थोड़ी सी

मज़मून सूझते हैं हज़ारों नए नए

क़ासिद ये ख़त नहीं मिरे ग़म की किताब है

मज़मून सूझते हैं हज़ारों नए नए

क़ासिद ये ख़त नहीं मिरे ग़म की किताब है

गर कोई पूछे मुझे आप इसे जानते हैं

हो के अंजान वो कहते हैं कहीं देखा है

गर कोई पूछे मुझे आप इसे जानते हैं

हो के अंजान वो कहते हैं कहीं देखा है

आए भी वो चले भी गए याँ किसे ख़बर

हैराँ हूँ मैं ख़याल है ये या कि ख़्वाब है

आए भी वो चले भी गए याँ किसे ख़बर

हैराँ हूँ मैं ख़याल है ये या कि ख़्वाब है

कहीं उस बज़्म तक रसाई हो

फिर कोई देखे एहतिमाम मिरा

कहीं उस बज़्म तक रसाई हो

फिर कोई देखे एहतिमाम मिरा

ये भी नया सितम है हिना तो लगाएँ ग़ैर

और उस की दाद चाहें वो मुझ को दिखा के हाथ

ये भी नया सितम है हिना तो लगाएँ ग़ैर

और उस की दाद चाहें वो मुझ को दिखा के हाथ

अभी तो कहा ही नहीं मैं ने कुछ

अभी तुम जो आँखें चुराने लगे

अभी तो कहा ही नहीं मैं ने कुछ

अभी तुम जो आँखें चुराने लगे

उठता हूँ उस की बज़्म से जब हो के ना-उमीद

फिर फिर के देखता हूँ कोई अब पुकार ले

उठता हूँ उस की बज़्म से जब हो के ना-उमीद

फिर फिर के देखता हूँ कोई अब पुकार ले

अब क्या मिलें किसी से कहाँ जाएँ हम 'निज़ाम'

हम वो नहीं रहे वो मोहब्बत नहीं रही

अब क्या मिलें किसी से कहाँ जाएँ हम 'निज़ाम'

हम वो नहीं रहे वो मोहब्बत नहीं रही

जो कुछ इशारे होते हैं सब देखता हूँ मैं

सारी शरारत आप की मेरी नज़र में है

जो कुछ इशारे होते हैं सब देखता हूँ मैं

सारी शरारत आप की मेरी नज़र में है

सच है 'निज़ाम' याद भी उस को होंगे हम

पर क्या करें वो हम से भुलाया जाएगा

सच है 'निज़ाम' याद भी उस को होंगे हम

पर क्या करें वो हम से भुलाया जाएगा

यूँ तो रूठे हैं मगर लोगों से

पूछते हाल हैं अक्सर मेरा

यूँ तो रूठे हैं मगर लोगों से

पूछते हाल हैं अक्सर मेरा

बन आया जब उन को कोई जवाब

तो मुँह फेर कर मुस्कुराने लगे

बन आया जब उन को कोई जवाब

तो मुँह फेर कर मुस्कुराने लगे

ज़िद है गर है तो हो सभी के साथ

या मिलने की ज़िद मुझी से है

ज़िद है गर है तो हो सभी के साथ

या मिलने की ज़िद मुझी से है

क्या दुआ रोज़-ए-हश्र की माँगें

वहाँ पर भी यही ख़ुदा होगा

क्या दुआ रोज़-ए-हश्र की माँगें

वहाँ पर भी यही ख़ुदा होगा

क्या किसी से किसी का हाल कहें

नाम भी तो लिया नहीं जाता

क्या किसी से किसी का हाल कहें

नाम भी तो लिया नहीं जाता

तेरा मिलना तो है मुश्किल मगर इतना तो हुआ

अपना मरना मुझे आसाँ हुआ था सो हुआ

तेरा मिलना तो है मुश्किल मगर इतना तो हुआ

अपना मरना मुझे आसाँ हुआ था सो हुआ

किस का है इंतिज़ार कहाँ ध्यान है लगा

क्यूँ चौंक चौंक जाते हो आवाज़-ए-पा के साथ

किस का है इंतिज़ार कहाँ ध्यान है लगा

क्यूँ चौंक चौंक जाते हो आवाज़-ए-पा के साथ

तुझ से ही छुपाऊँगा ग़म अपना

तुझ से ही कहूँगा गर कहूँगा

तुझ से ही छुपाऊँगा ग़म अपना

तुझ से ही कहूँगा गर कहूँगा

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