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jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

जगजीत सिंह पर शेर

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है

इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

निदा फ़ाज़ली

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले

बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर मनुष्य की खत्म होने वाली चाहत और अतृप्ति को दिखाता है। “दम निकलना” एक रूपक है, जो बताता है कि इच्छा की तीव्रता इंसान को भीतर तक थका देती है। फिर भी, जब कई अरमान पूरे हो जाते हैं, तब भी संतोष नहीं मिलता, क्योंकि दिल की माँगें लगातार बढ़ती रहती हैं।

मिर्ज़ा ग़ालिब

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं

तुझे ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं

Interpretation: Rekhta AI

कवि कहता है कि अनुभव के कारण वह आने वाली बात को पहले ही भांप लेता है। “कदमों की आहट” ज़िंदगी के दुख-सुख, उसकी जिम्मेदारियाँ और बार-बार लौटने वाले हालात का संकेत है। ज़िंदगी से सीधे बात करके वह जताता है कि अब उसे कोई भ्रम नहीं रहता। भाव में थकान, समझ और स्वीकार का मेल है।

फ़िराक़ गोरखपुरी

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

Interpretation: Rekhta AI

शायर कहता है कि प्रेम की पुकार का असर होने में बहुत लंबा समय लगता है, जबकि इंसान की ज़िंदगी बहुत छोटी है। प्रेमिका की 'ज़ुल्फ़ों के सर होने' यानी प्रेम की जटिलताओं के सुलझने तक, इंतज़ार करने वाला प्रेमी जीवित ही नहीं बचता। यह शेर इंसान की मजबूरी और समय की कमी को दर्शाता है।

मिर्ज़ा ग़ालिब

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं

दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं

कैफ़ी आज़मी

बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता

जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता

निदा फ़ाज़ली

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो

क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो

कैफ़ी आज़मी

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है

नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है

हस्तीमल हस्ती

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता

निकलता रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता

अमीर मीनाई

कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे

तू ने आँखों से कोई बात कही हो जैसे

फ़ैज़ अनवर

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

सईद राही

तेरे आने की जब ख़बर महके

तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके

नवाज़ देवबंदी
बोलिए