'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी
सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज
जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है
उसी का सब है जल्वा जो जहाँ में आश्कारा है
पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था
हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का
वो रातों-रात 'सिरी-कृष्ण' को उठाए हुए
बला की क़ैद से 'बसदेव' का निकल जाना
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में रात के अँधेरे में वसुदेव का बालक श्रीकृष्ण को लेकर जेल से निकल जाना दिखाया गया है। “भयानक कैद” अत्याचार और डर का रूपक है, और “निकल जाना” मुक्ति तथा आशा का संकेत। भाव यह है कि आस्था और पिता का साहस संकट के बीच भी रक्षा का रास्ता बना देता है, जैसे कोई चमत्कार हो।
दीवार-ओ-दर पे कृष्ण की लीला के नक़्श हैं
मंदिर है ये तो 'कृष्ण' के दरबार की तरह