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श्री कृष्ण शायरी पर शेर

'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी

सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज

हसरत मोहानी

जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है

उसी का सब है जल्वा जो जहाँ में आश्कारा है

भारतेंदु हरिश्चंद्र

पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था

हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का

हसरत मोहानी

वो रातों-रात 'सिरी-कृष्ण' को उठाए हुए

बला की क़ैद से 'बसदेव' का निकल जाना

Interpretation: Rekhta AI

इस शेर में रात के अँधेरे में वसुदेव का बालक श्रीकृष्ण को लेकर जेल से निकल जाना दिखाया गया है। “भयानक कैद” अत्याचार और डर का रूपक है, और “निकल जाना” मुक्ति तथा आशा का संकेत। भाव यह है कि आस्था और पिता का साहस संकट के बीच भी रक्षा का रास्ता बना देता है, जैसे कोई चमत्कार हो।

फ़िराक़ गोरखपुरी

दीवार-ओ-दर पे कृष्ण की लीला के नक़्श हैं

मंदिर है ये तो 'कृष्ण' के दरबार की तरह

शोभा कुक्कल
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