हुनर पर शेर
हुनरमंदी इन्सान की शख़्सियत
को निखारती है। हर शख़्स अपने अंदर कुछ सलाहियतें लेकर पैदा होता है जिनको पहचान कर वो एक बड़े हुनर में तबदील कर लेता है और यही हुनर उस की शख़्सियत की पहचान बनता है। हुनर के उनवान से हम जो अशआर आप तक पहुँचा रहे हैं वो ज़िंदगी में नए हौसलों से भरते हैं और नई मंज़िलों पर गामज़न करते हैं।
न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब ओ हुनर
पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में आत्म-चिंतन की बात है। अपनी ही स्थिति से अनजान व्यक्ति अक्सर दूसरों की कमियाँ खोजता और उनके गुण गिनता रहता है। लेकिन जैसे ही वह अपनी कमज़ोरियों को देखता है, उसके भीतर विनम्रता आती है और निर्णय करने की कठोरता घट जाती है। तब उसकी दृष्टि अधिक करुण और समझदार हो जाती है।
शर्त सलीक़ा है हर इक अम्र में
ऐब भी करने को हुनर चाहिए
Interpretation:
Rekhta AI
मीर तक़ी मीर कहते हैं कि हर काम की असली शर्त शिष्टता और समझदारी है। अगर कमी बताने का ढंग सही न हो, तो बात सुधार की जगह चोट बन जाती है। इसलिए आलोचना भी एक तरह की कला है, जिसमें नरमी, समय और सही शब्दों का ध्यान चाहिए।
हमारे ऐब ने बे-ऐब कर दिया हम को
यही हुनर है कि कोई हुनर नहीं आता
वो साफ़-गो है मगर बात का हुनर सीखे
बदन हसीं है तो क्या बे-लिबास आएगा
हमारे ऐब में जिस से मदद मिले हम को
हमें है आज कल ऐसे किसी हुनर की तलाश
जिस की ख़ातिर मैं भुला बैठा था अपने आप को
अब उसी के भूल जाने का हुनर भी देखना
मुझ में थे जितने ऐब वो मेरे क़लम ने लिख दिए
मुझ में था जितना हुस्न वो मेरे हुनर में गुम हुआ
तेशा-ब-कफ़ को आइना-गर कह दिया गया
जो ऐब था उसे भी हुनर कह दिया गया
'क़ाएम' मैं इख़्तियार किया शाइ'री का ऐब
पहुँचा न कोई शख़्स जब अपने हुनर तलक
तुझे भुला के भी सदियाँ भुला नहीं सकतीं
मगर ये शर्त है ख़ुद में कमाल पैदा कर
-
टैग : प्रेरणादायक
हम परिंदों से हुनर छीनेगा कौन
जल गया इक घर तो सौ घर बन गए
ख़ूबान-ए-जहाँ हों जिस से तस्ख़ीर
ऐसा कोई हम ने हुनर न देखा