होंठ पर 20 बेहतरीन शेर
महबूब के लबों की तारीफ़-ओ-तहसीन
और उनसे शिकवे-शिकायत शायरी में आम है। लबों की ख़ूबसूरती और उनकी ना-ज़ुकी के मज़मून को शायेरों ने नए नए दढिंग से बाँधा है । लबों के शेरी बयान में एक पहलू ये भी रहा है कि उन पर एक गहरी चुप पड़ी हुई है, वो हिलते नहीं आशिक़ से बात नहीं करते। ये लब कहीं गुलाब की पंखुड़ी की तरह नाज़ुक हैं तो कहीं उनसे फूल झड़ते हैं। इस मज़मून में और भी कई दिल-चस्प पहलू हैं। हमारा ये इन्तिख़ाब पढ़िए।
टॉप 20 सीरीज़
- 20 बेहतरीन प्रेरणादायक शेर
- अंगड़ाई पर 20 बेहतरीन शेर
- अख़बार पर 20 बेहतरीन शेर
- अदा पर 20 बेहतरीन शेर
- आँख पर 20 बेहतरीन शेर
- आँसू पर 20 बेहतरीन शेर
- आईने पर 20 बेहतरीन शेर
- आदमी/इंसान शायरी
- इन्तिज़ार शायरी
- इश्क़ पर 20 बेहतरीन शेर
- उदास शायरी
- किताब शायरी
- ख़ामोशी पर शायरी
- चाँद पर 20 बेहतरीन शेर
- ज़िन्दगी शायरी
- जुदाई पर 20 बेहतरीन शेर
- ज़ुल्फ़ शायरी
- टूटे हुए दिलों के लिए 20 बेहतरीन शेर
- तन्हाई पर शेर
- तस्वीर पर 20 बेहतरीन शेर
- दर्द शायरी
- दिल शायरी
- दीदार पर शायरी
- दुआ पर 20 बेहतरीन शेर
- दुनिया शायरी
- दोस्त/दोस्ती शायरी
- धोखा पर 20 बेहतरीन शेर
- नए साल पर बेहतरीन शेर
- नुशूर वाहिदी के 20 बेहतरीन शेर
- फूल शायरी
- बारिश पर 20 बेहतरीन शेर
- बोसे पर 20 बेहतरीन शेर
- मुलाक़ात शायरी
- मुस्कुराहट शायरी
- मौत शायरी
- याद शायरी
- रेलगाड़ियों पर 20 बेहतरीन शेर
- वक़्त शायरी
- वफ़ा शायरी
- विदाई शायरी
- विसाल शायरी
- शराब शायरी
- सफ़र शायरी
- सर्वाधिक उद्धरित किए जाने वाले 20 बेहतरीन शेर
- स्वागत शायरी
- हुस्न शायरी
- होंठ पर शायरी
नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
उसके होंठों की नाज़ुकता बताना बहुत कठिन है।
वे गुलाब की एक पंखुड़ी जैसे मुलायम हैं।
उसके होंठों की नाज़ुकता बताना बहुत कठिन है।
वे गुलाब की एक पंखुड़ी जैसे मुलायम हैं।
-
टैग्ज़: फ़ेमस शायरीऔर 1 अन्य
कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रक़ीब
गालियाँ खा के बे-मज़ा न हुआ
तुम्हारे होंठ इतने मीठे हैं कि मेरा दुश्मन (रक़ीब),
तुमसे गालियाँ सुनकर भी बुरा नहीं माना और न ही उसका मज़ा किरकिरा हुआ।
तुम्हारे होंठ इतने मीठे हैं कि मेरा दुश्मन (रक़ीब),
तुमसे गालियाँ सुनकर भी बुरा नहीं माना और न ही उसका मज़ा किरकिरा हुआ।
-
टैग: लब
सो देख कर तिरे रुख़्सार ओ लब यक़ीं आया
कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी
-
टैग्ज़: रुख़्सारऔर 1 अन्य
सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूँ मैं
ख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह
-
टैग्ज़: इश्क़और 5 अन्य
मिल गए थे एक बार उस के जो मेरे लब से लब
'उम्र भर होंटों पे अपने मैं ज़बाँ फेरा किया
-
टैग: किस
जिस लब के ग़ैर बोसे लें उस लब से 'शेफ़्ता'
कम्बख़्त गालियाँ भी नहीं मेरे वास्ते
-
टैग: किस
आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार
लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर
-
टैग्ज़: किसऔर 2 अन्य
लब-ए-नाज़ुक के बोसे लूँ तो मिस्सी मुँह बनाती है
कफ़-ए-पा को अगर चूमूँ तो मेहंदी रंग लाती है
-
टैग्ज़: किसऔर 2 अन्य
ब-वक़्त-ए-बोसा-ए-लब काश ये दिल कामराँ होता
ज़बाँ उस बद-ज़बाँ की मुँह में और मैं ज़बाँ होता