याद पर मशहूर 20 शेर
‘याद’ को उर्दू शाइरी
में एक विषय के तौर पर ख़ास अहमिय हासिल है । इस की वजह ये है कि नॉस्टेलजिया और उस से पैदा होने वाली कैफ़ीयत, शाइरों को ज़्यादा रचनात्मकता प्रदान करती है । सिर्फ़ इश्क़-ओ-आशिक़ी में ही ‘याद’ के कई रंग मिल जाते हैं । गुज़रे हुए लम्हों की कसक हो या तल्ख़ी या कोई ख़ुश-गवार लम्हा सब उर्दू शाइरी में जीवन के रंगों को पेश करते हैं । इस तरह की कैफ़ियतों से सरशार उर्दू शाइरी का एक संकलन यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है ।
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
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टैग्ज़: इश्क़और 7 अन्य
नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं
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टैग्ज़: फ़ेमस शायरीऔर 1 अन्य
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
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टैग्ज़: यादऔर 1 अन्य
तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें
हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ प्रेम की एकतरफ़गी साफ दिखती है: प्रिय व्यक्ति को याद करने की फुरसत ही नहीं, जबकि प्रेमी का मन पूरी तरह उसी में डूबा है। “याद” और “भूलना” मन की लगन और प्राथमिकता के रूपक हैं—एक ओर उदासीनता, दूसरी ओर खुद को मिटा देने वाली निष्ठा। इसी असमानता से पीड़ा पैदा होती है।
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ प्रेम की एकतरफ़गी साफ दिखती है: प्रिय व्यक्ति को याद करने की फुरसत ही नहीं, जबकि प्रेमी का मन पूरी तरह उसी में डूबा है। “याद” और “भूलना” मन की लगन और प्राथमिकता के रूपक हैं—एक ओर उदासीनता, दूसरी ओर खुद को मिटा देने वाली निष्ठा। इसी असमानता से पीड़ा पैदा होती है।
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टैग्ज़: बेवफ़ाईऔर 1 अन्य
याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है
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टैग्ज़: इश्क़और 4 अन्य
याद उस की इतनी ख़ूब नहीं 'मीर' बाज़ आ
नादान फिर वो जी से भुलाया न जाएगा
Interpretation:
Rekhta AI
कवि अपने ही मन को समझा रहा है कि प्रिय की याद को ज़रूरत से ज़्यादा सुंदर मत मानो। लेकिन वह जानता है कि एक बार फिर उसी याद को जगह दी, तो वह दिल पर चिपक जाएगी और मिटेगी नहीं। यहाँ प्रेम की तड़प, पछतावा और बेबस़ी साथ-साथ हैं। याद ही दिल की कैद बन जाती है।
Interpretation:
Rekhta AI
कवि अपने ही मन को समझा रहा है कि प्रिय की याद को ज़रूरत से ज़्यादा सुंदर मत मानो। लेकिन वह जानता है कि एक बार फिर उसी याद को जगह दी, तो वह दिल पर चिपक जाएगी और मिटेगी नहीं। यहाँ प्रेम की तड़प, पछतावा और बेबस़ी साथ-साथ हैं। याद ही दिल की कैद बन जाती है।
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टैग: याद
ज़रा सी बात सही तेरा याद आ जाना
ज़रा सी बात बहुत देर तक रुलाती थी
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टैग्ज़: इश्क़और 2 अन्य
मुझे याद करने से ये मुद्दआ था
निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते
Interpretation:
Rekhta AI
कवि कहता है कि प्रिय की याद भी यहाँ राहत नहीं, बल्कि यातना बन गई है। “हिचकियाँ” विरह की बार-बार उठती पीड़ा का रूपक हैं, जो साँस को रोकती हुई लगती हैं। भाव यह है कि याद का सिलसिला इतना तीखा है कि जीवन तक छीन लेने जैसा लगता है। इस में कटाक्ष और दर्द दोनों साथ चलते हैं।
Interpretation:
Rekhta AI
कवि कहता है कि प्रिय की याद भी यहाँ राहत नहीं, बल्कि यातना बन गई है। “हिचकियाँ” विरह की बार-बार उठती पीड़ा का रूपक हैं, जो साँस को रोकती हुई लगती हैं। भाव यह है कि याद का सिलसिला इतना तीखा है कि जीवन तक छीन लेने जैसा लगता है। इस में कटाक्ष और दर्द दोनों साथ चलते हैं।
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टैग्ज़: यादऔर 1 अन्य