दर्द पर 20 मशहूर शेर
ज़िन्दगी की कड़वी सच्चाई
कईं बार दर्द की सूरत में बाहर निकलती है.l शायरी दर्द की अवस्था को न सिर्फ दिशा देता है बल्कि ऐसे समय में हमें स्थिरता भी प्रदान करता है ताकि ज़िन्दगी की निरंतर संघर्ष सहज हो l
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इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया
Interpretation:
Rekhta AI
शायर कहता है कि इश्क़ ने ही जिंदगी को जीने लायक बनाया और उसे रंगीन कर दिया। प्रेम दुनिया के आम दुखों का इलाज तो है, मगर यह खुद एक ऐसी बीमारी है जो लाइलाज है। यानी इश्क़ जीवन की निरसता की दवा है, पर खुद एक मीठा और अनंत दर्द भी है।
Interpretation:
Rekhta AI
शायर कहता है कि इश्क़ ने ही जिंदगी को जीने लायक बनाया और उसे रंगीन कर दिया। प्रेम दुनिया के आम दुखों का इलाज तो है, मगर यह खुद एक ऐसी बीमारी है जो लाइलाज है। यानी इश्क़ जीवन की निरसता की दवा है, पर खुद एक मीठा और अनंत दर्द भी है।
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टैग्ज़: इश्क़और 3 अन्य
ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
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टैग्ज़: एकताऔर 2 अन्य
अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे
बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे
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टैग्ज़: उदासीऔर 4 अन्य
दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब
मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं
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टैग्ज़: दर्दऔर 1 अन्य
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता
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टैग्ज़: जगजीत सिंहऔर 1 अन्य
रहा न दिल में वो बेदर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में प्रिय के चले जाने और दर्द के रह जाने की बात है: इंसान चला जाता है, पर पीड़ा मन में बनी रहती है। दूसरी पंक्ति उस निजी दुख को एक बड़े सच में बदल देती है कि न दिल किसी का स्थायी ठिकाना है, न दुनिया—सब कुछ अस्थायी है। “मक़ाम” यहाँ दिल और जीवन, दोनों का रूपक बन जाता है।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में प्रिय के चले जाने और दर्द के रह जाने की बात है: इंसान चला जाता है, पर पीड़ा मन में बनी रहती है। दूसरी पंक्ति उस निजी दुख को एक बड़े सच में बदल देती है कि न दिल किसी का स्थायी ठिकाना है, न दुनिया—सब कुछ अस्थायी है। “मक़ाम” यहाँ दिल और जीवन, दोनों का रूपक बन जाता है।
कुछ दर्द की शिद्दत है कुछ पास-ए-मोहब्बत है
हम आह तो करते हैं फ़रियाद नहीं करते
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टैग्ज़: आहऔर 1 अन्य
आदत के ब'अद दर्द भी देने लगा मज़ा
हँस हँस के आह आह किए जा रहा हूँ मैं
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टैग्ज़: आहऔर 1 अन्य
जब कि पहलू से यार उठता है
दर्द बे-इख़्तियार उठता है
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर बिछड़ने की उसी पल की चुभन दिखाता है: प्रिय का पास से उठना ही दर्द को जगा देता है। “उठना” यहाँ दर्द के भीतर से खड़े हो जाने, तेज़ हो जाने का रूपक है। भाव का केंद्र बेबसी है—मन चाहकर भी उस पीड़ा को रोक नहीं पाता।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर बिछड़ने की उसी पल की चुभन दिखाता है: प्रिय का पास से उठना ही दर्द को जगा देता है। “उठना” यहाँ दर्द के भीतर से खड़े हो जाने, तेज़ हो जाने का रूपक है। भाव का केंद्र बेबसी है—मन चाहकर भी उस पीड़ा को रोक नहीं पाता।
दिल सरापा दर्द था वो इब्तिदा-ए-इश्क़ थी
इंतिहा ये है कि 'फ़ानी' दर्द अब दिल हो गया
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टैग्ज़: दर्दऔर 1 अन्य
मिरे लबों का तबस्सुम तो सब ने देख लिया
जो दिल पे बीत रही है वो कोई क्या जाने
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टैग्ज़: दर्दऔर 1 अन्य
हाथ रख रख के वो सीने पे किसी का कहना
दिल से दर्द उठता है पहले कि जिगर से पहले
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टैग्ज़: दर्दऔर 1 अन्य